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Bihar Politics: जब लालू यादव ने कहा था- नीतीश मेरे पैर पर गिर पड़े, बयान से मच गया था सियासी घमासान

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के राजनीतिक रिश्तों में कई बार दोस्ती और टकराव देखने को मिला। 2014 के उपचुनाव के दौरान लालू के एक बयान ने गठबंधन में तनाव पैदा कर दिया था।

पटना। बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार का रिश्ता लंबे समय तक दोस्ती, विरोध और फिर गठबंधन के उतार-चढ़ाव से गुजरता रहा है। दोनों नेताओं ने अलग-अलग राजनीतिक रास्ते अपनाए, लेकिन बदलते चुनावी समीकरणों ने कई बार उन्हें एक साथ भी ला खड़ा किया। वर्ष 2014 में ऐसा ही एक घटनाक्रम सामने आया, जब गठबंधन के बीच लालू यादव के बयान ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था।


लोकसभा चुनाव में हार के बाद बदले राजनीतिक समीकरण


2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को बड़ी सफलता मिली थी। बिहार में नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड को केवल दो सीटें मिलीं, जबकि लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल को चार सीटों पर जीत मिली। दोनों दलों को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी।


इस नतीजे के बाद भाजपा का मुकाबला करने के लिए बिहार में विपक्षी दलों के बीच नए समीकरण बनने लगे। लंबे समय से एक-दूसरे के विरोधी रहे लालू यादव और नीतीश कुमार भी करीब आए। अगस्त 2014 में विधानसभा की 10 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए दोनों दलों ने कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया।


दो दशक बाद एक मंच पर आए थे दोनों नेता


11 अगस्त 2014 को हाजीपुर में लालू यादव और नीतीश कुमार ने संयुक्त चुनाव प्रचार शुरू किया। करीब दो दशक बाद दोनों नेताओं का एक साथ मंच साझा करना बिहार की राजनीति की बड़ी घटना माना गया। इस गठबंधन का प्रमुख उद्देश्य भाजपा को चुनावी चुनौती देना था।


हालांकि, दोनों नेताओं के बीच पुरानी राजनीतिक कड़वाहट पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी। गठबंधन बनने के कुछ ही समय बाद लालू यादव के एक बयान ने इस रिश्ते में तनाव की स्थिति पैदा कर दी।


‘नीतीश मेरे पैर पर गिर गए’ वाले बयान पर विवाद


18 अगस्त 2014 को भागलपुर में उपचुनाव के प्रचार के दौरान लालू यादव ने गठबंधन को लेकर टिप्पणी की। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने कहा था कि जब नीतीश कुमार उनके पैर पर गिर गए, तो वह उन्हें उठाकर कैसे फेंक देते। इस बयान को नीतीश कुमार के राजनीतिक सम्मान से जोड़कर देखा गया और जदयू के नेताओं ने नाराजगी जताई।


उस समय जदयू में रहे शकुनी चौधरी ने भी इस बयान पर आपत्ति जताते हुए नीतीश कुमार को गठबंधन तोड़ने की सलाह दी थी। विवाद ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि भाजपा के खिलाफ बना नया राजनीतिक गठबंधन आपसी अविश्वास के बीच कितना टिक पाएगा।


बयान की सफाई ने भी खींचा ध्यान


विवाद बढ़ने पर लालू यादव की ओर से बयान के अर्थ को लेकर सफाई दिए जाने की चर्चा हुई। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में बयानबाजी और गठबंधन के भीतर सम्मान के सवाल को प्रमुखता से सामने ला दिया।


लालू और नीतीश के राजनीतिक संबंध आगे भी कई बार बदले। कभी दोनों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा, तो कभी वे एक-दूसरे के खिलाफ खड़े दिखाई दिए। यही उतार-चढ़ाव बिहार की राजनीति में उनके लंबे और जटिल रिश्ते की पहचान बना रहा।

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